जो बांहों में भर ले पगले उसका ही मधुमास ....!
व्यस्तताओं के कारण कई दिनों के बाद आज लौटा हूँ परिकल्पना पर । इस बार मैंने फागुन पर कुछ भी नही लिखा ...न कोई कविता ...न कोई गीत .....
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जो बांहों में भर ले पगले उसका ही मधुमास ....!
व्यस्तताओं के कारण कई दिनों के बाद आज लौटा हूँ परिकल्पना पर । इस बार मैंने फागुन पर कुछ भी नही लिखा ...न कोई कविता ...न कोई गीत .....