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उम्र से न सपने आंके जा सकते हैं , न सपनों को पिरोने की कला उम्र से न सपने आंके जा सकते हैं , न सपनों को पिरोने की कला

'जिन खोजा तिन्ह पाइया गहरे पानी पैठ जो बुरा डूबन डरा रहा किनारे बैठ '..... नहीं डरता मैं , तभी आपकी आँखों से जो रह गए ओझल उनको क...

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12:23 pm

कुछ उनकी कुछ इनकी .... कुछ उनकी कुछ इनकी ....

आज मेरे हाथों में दो पोटलियाँ हैं - कुछ कल के एहसास , कुछ आज के . मैं कल भी था मैं आज भी हूँ , यही तो हर पल कहता आ रहा हूँ . बस चेहरे...

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11:03 am
 
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