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उत्सव की सीढ़ियाँ चढ़ते चढ़ते उत्सव की सीढ़ियाँ चढ़ते चढ़ते

रश्मि के साथ उत्सव की सीढ़ियाँ चढ़ते चढ़ते आज मैं मिला कविता किरण से .... मिलना तो पहले भी हुआ , सुना , पढ़ा...पहले भी , पर आज इस उत्सव मे...

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12:30 pm

जाओ कोई दो पेंसिल बैटरी लाओ जाओ कोई दो पेंसिल बैटरी लाओ

आज बैटरी ख़त्म है , जाओ कोई दो पेंसिल बैटरी लाओ ... तब तक मैं सुनता हूँ कुछ रचनाएँ ..... क्या धक्कम धुक्की है , ठीक है बैठो तुम भी सुन लो ...

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11:04 am
 
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