लौटा है शीत जब से गाँव
प्रीति भई बावरी , देख घटा सांवरी , है धरती पे उसके न पाँव , लौटा है शीत जब से गाँव । सुरमई उजालों में चुम्बन ले घासों को , बेंध रही हौले से...
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लौटा है शीत जब से गाँव
प्रीति भई बावरी , देख घटा सांवरी , है धरती पे उसके न पाँव , लौटा है शीत जब से गाँव । सुरमई उजालों में चुम्बन ले घासों को , बेंध रही हौले से...