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ऐसा एहसास ऐसी तपिश हर रोज हमारे घर आए :नवीन कुमार ऐसा एहसास ऐसी तपिश हर रोज हमारे घर आए :नवीन कुमार

अभूत अनुभूति - इक रोज़ हमारे घर आए इमरोज़ हमारे घर आए ऐसा एहसास ऐसी तपिश हर रोज हमारे घर आए इमरोज़ हमारे घर आए ऐसा ज...

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4:07 pm

जो सत्ता में है वह मुस्कुरा रहा है, जो नहीं है वह गुर्रा रहा है जो सत्ता में है वह मुस्कुरा रहा है, जो नहीं है वह गुर्रा रहा है

देश की मौजूदा स्थिति , २ अक्तूबर को सोचकर चला था कि चलता हूँ अपनों के बीच, पर आकर जो हाल देखा- तो,ह्रदय तार-तार हो गया ! जगह-जगह मेरी तस्व...

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2:47 pm

ब्लोगोत्सव-२०१० : बच्चे भी तो बेरौनक जगह जाना नही चाहते ना अब ब्लोगोत्सव-२०१० : बच्चे भी तो बेरौनक जगह जाना नही चाहते ना अब

भई, अबके गर्मियों की छुट्टियों मे हिंदुस्तान मे ही कहीं चलेंगे। परदेस चलने का कुछ मूड नहीं बन रहा!" सुबह बाथरूम मे खड़ा विपुल शेव करते ...

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3:56 pm

ब्लोगोत्सव-२०१० : ग्यारह बजे भी बिस्तर छोडे तो क्या फर्क पड़ जायेगा? ब्लोगोत्सव-२०१० : ग्यारह बजे भी बिस्तर छोडे तो क्या फर्क पड़ जायेगा?

आँखें खुलीं तो पाया आँगन में चटकीली धुप फैली है.हडबडाकर खाट से तकरीबन कूद ही पड़ा.लेकिन दुसरे ही क्षण लस्त हो फिर बैठ गया.कहाँ जाना है उसे?,...

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2:55 pm

ब्लोगोत्सव-२०१० : ये बेचारा हृदय की जन्मजात् बीमारी की वज़ह से नीला पड़ चुका है ब्लोगोत्सव-२०१० : ये बेचारा हृदय की जन्मजात् बीमारी की वज़ह से नीला पड़ चुका है

“तुम्हारे रतलाम के डॉक्टर डॉक्टर हैं या घसियारे?” एमवाय हॉस्पिटल इन्दौर के हृदयरोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल भराणी ने मरीज को पहली ही नज़र में देखते...

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2:03 pm

ब्लोगोत्सव-२०१० : क्या वह भौतिक पदार्थों के मोह से ऊपर उठ चुका है ? ब्लोगोत्सव-२०१० : क्या वह भौतिक पदार्थों के मोह से ऊपर उठ चुका है ?

बस से उतर कर शिवदास को समझ नहीं आ रहा था कि उसके गांव को कौन सा रास्ता मुड़ता है । पच्चीस वर्ष बाद वह अपने गाँव आ रहा था । जीवन के इतने वर्ष ...

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1:01 pm

ब्लोगोत्सव-२०१० : आपको इंतज़ार था, लीजिये हम आ गए .........! ब्लोगोत्सव-२०१० : आपको इंतज़ार था, लीजिये हम आ गए .........!

गर्म हवा के झोंके उदंडता पर उतारू होकर खिड़की किवाड़ पीट रहे थे ! पिघलती धूप में प्यासे कौवे की काँव  काँव  में घिघिआहट भरा विलाप शामिल था ....

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12:00 pm
 
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