स्वागत है पुन: आप सभी का परिकल्पना पर ... बहुत करीब से जाकर मिलो तो हर शख्स खुद से जुदा लगता है.... टकराता मैं सबसे हूँ , बढ़ भी जाता हूँ...
ओल्ड इस ऑल्वेज गोल्ड...
ओल्ड इस ऑल्वेज गोल्ड...
मैं समय हूँ और देख रहा हूँ ब्लॉगोत्सव की समस्त गतिविधियों को ....... रवीन्द्र जी इस तरह उलझे हुए हैं कि कह गए शनिवार को ,'उपस्थित हो...
बाल विज्ञान कथा और चिट्ठाकारों की विशेष परिचर्चा
आज का कार्यक्रम संपान्नता की ओर अग्रसर है...विगत कई दिनों से बच्चों के लिए उत्सव में कोई कार्यक्रम आयोजित नहीं हो पाया, इसलिए आज मैं केवल ब...
मेरी मान्यताओं को विभक्त करने से पहले अपने पर गौर करो
मेरी मान्यताओं को विभक्त करने से पहले अपने पर गौर करो
मेरे अपनों , मैं मोहनदास करमचंद गाँधी, आज आलोचनाओं के गुबार में अदृश्य होता जा रहा हूँ.....पर एक बार पीछे मुड़कर देखो- मैंने सत्य का आग्रह...
अब फिर समय आ गया है एक नयी क्रांति के आगाज का
अब फिर समय आ गया है एक नयी क्रांति के आगाज का
आदरणीय मातृभूमि, हार्दिक नमन, तुमसे बिछडे कई दसक बीत गए, लेकिन आत्मा आज भी तुम्हारी गोद में बिताये वात्सल्य से परिपूर्ण लम्हों के आकर्षण स...
जो सत्ता में है वह मुस्कुरा रहा है, जो नहीं है वह गुर्रा रहा है
जो सत्ता में है वह मुस्कुरा रहा है, जो नहीं है वह गुर्रा रहा है
देश की मौजूदा स्थिति , २ अक्तूबर को सोचकर चला था कि चलता हूँ अपनों के बीच, पर आकर जो हाल देखा- तो,ह्रदय तार-तार हो गया ! जगह-जगह मेरी तस्व...
क्या मैंने ऐसे देश की तो कल्पना नहीं की थी ?
क्या मैंने ऐसे देश की तो कल्पना नहीं की थी ?
मेरे प्रिय देशवासियों , आज अचानक ही मन में विचार आया कि आप सबको पत्र के माध्यम से अपने मन की बात कहूँ. मैंने अपने मन में भारत का जो चित्र ...
मुंह में गाँधी और बगल में देश की बर्बादी
मुंह में गाँधी और बगल में देश की बर्बादी
मेरे देश, मोहनदास करमचंद गाँधी मेरा नाम है. कभी सत्य और अहिंसा का पर्याय मैं, अब सिर्फ असत्य और हिंसक लोगों की जुबान पर रहता हूँ, या फिर पा...
जिन्हें नाज है हिंद पर, उनके नाम
जिन्हें नाज है हिंद पर, उनके नाम
मैं समय हूँ ! आज उपस्थित हूँ पुन: परिकल्पना पर ब्लोगोत्सव-२०१० के बारहवें दिन के - प्रभामंडल को महसूस करने और कराने हेतु आज क्रान्ति ...
