मानवता के स्वप्न अब तक अधूरे है
मानवता के स्वप्न अब तक अधूरे है स्वप्न मेरे, अब तक वो अधूरे है ; जो मानव के रूप में मैंने देखे है ! मानवता के उन्ही स्वप...
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मानवता के स्वप्न अब तक अधूरे है
मानवता के स्वप्न अब तक अधूरे है स्वप्न मेरे, अब तक वो अधूरे है ; जो मानव के रूप में मैंने देखे है ! मानवता के उन्ही स्वप...
अंतर्जालवासियों के लिए लिखी गई कविता - कविता में कैरियर
कविता लिखना यूं तो कवि के लिए आसान होता है पर जो नहीं होते हैं कवि वे भी लिख लेते हैं कविता अच्छी खासी बे-तराशी सुनने वाले खास...
बड़ा बनूंगा, बूढ़ा होकर मैं नहीं मरूंगा (कविता)
मौत को अब तू मनाना सीख ले बुलाए मौत तुरंत जाना सीख ले मैं तैयार हूं आ मौत , कर मेरा सामना मैं नहीं करूंगा तुझे मना डर कर नह...
मेरा बाजू वाला घर
खामोशियों के आलिंगन में आबद्ध वह गुब्बारा सुबह से तैरता हुआ अचानक फूट पड़ता है, तब - जब हमारे आँगन में उतरता है रात का अन्धेरा चुपके से । मे...
क्या ठीक हों जाएगा ?
जब - बीमार अस्पताल की बीमार खाट पर पडी मेरी बूढ़ी बीमार माँ खांस रही थी बेतहाशा तब महसूस रहा था मैं कि, कैसे - मौत से जूझती है एक आम औरत । ...
प्रेम तकलीफ है .....पर आदमी बनने के लिए जरुरी है तकलीफ से गुजरना ....!
जहां समाप्ति की नियति है वहां हर कर्म क्षणिक और अपने लिए गढ़ा गया हर अभिप्राय भ्रम होता है इसलिए- शुरू की जानी चाहिए मृत्यु से जीवन की बात स...
दौड़ा दी मुहब्बत नस-नस में बंसी के बजाने वाले ने ...
आज श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के लिए अधिकांश मंदिर सजधज कर तैयार हैं। अधिकांश मंदिरों में 'जय कन्हैया लाल' के जयकारे और 'गिरधर नागर ...
हल्ला हुआ गली दर गल्ली। तिल्ली सिंह ने जीती दिल्ली।।
पुन: स्वागत है आपका परिकल्पना पर मैं यद्यपि बाल कविताएँ और कहानियां लिखता हूँ ऐसे में मेरे आज के उद्बोधन में बाल कविताएँ न हो तो शायद ब...
मैं तुम्हारा हूँ !
आपका पुन: स्वागत है परिकल्पना पर परिकल्पना की इस अनोखी परिकल्पना को आयामित करने में जिस व्यक्तित्व की बड़ी भूमिका रही है वे हैं आदरणीया श्र...
पिछले पोस्ट में आपने शेफाली की व्यंग्य कथा : मजे का अर्थशास्त्र पढ़ा . शेफाली जी मूलत: व्यंग्य प्रस्तुति के लिए जानी जाती हैं वे कहती भी है...
विश्व के हर देश में फलित है ये हिंदी ब्लॉग जगत :रेखा श्रीवास्तव
" विश्व के हर देश में देश के हर कोण में, फलित है ये हिंदी ब्लॉग जगत - एक लक्ष्य से जुड़ें सभी व्योम के विस्तार सा संसृति के विचा...
भारतीय मुद्रा की इकाई बनता रुपया और गुमशुदा होता पैसा(एक व्यंग्य)------ दीपक 'मशाल'
'गरीबों की सुनो... वो तुम्हारी सुनेगा.... तुम एक पैसा दोगे ... वो एक लाख देगा...' कहने की जरूरत नहीं समझ आती की इस गाने का एक...
एक का सिक्का जब हथेलियों में धरा जाता था तो क्या होता था पूछते हो तो सुनो ....
बचपन पहाडी झरने सा शुद्ध और निर्मल होता है , जीवन सतरंगी झूले सा लगता है-- कहीं कोई चिंता नहीं, अगर कभी उदास हुए भी तो वह एहसास चिड़िया की त...