कविता लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
कविता लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

अंतर्जालवासियों के लिए लिखी गई कविता - कविता में कैरियर अंतर्जालवासियों के लिए लिखी गई कविता - कविता में कैरियर

कविता लिखना यूं तो कवि के लिए आसान होता है पर जो नहीं होते हैं कवि वे भी लिख लेते हैं कविता अच्छी  खासी बे-तराशी सुनने वाले खास...

और जानिएं »
12:13 am

बड़ा बनूंगा, बूढ़ा होकर मैं नहीं मरूंगा  (कविता) बड़ा बनूंगा, बूढ़ा होकर मैं नहीं मरूंगा (कविता)

मौत को अब तू मनाना सीख ले बुलाए मौत तुरंत जाना सीख ले मैं तैयार हूं आ मौत ,  कर मेरा सामना मैं नहीं करूंगा तुझे मना डर कर नह...

और जानिएं »
8:06 am

मेरा बाजू वाला घर मेरा बाजू वाला घर

खामोशियों के आलिंगन में आबद्ध वह गुब्बारा सुबह से तैरता हुआ अचानक फूट पड़ता है, तब - जब हमारे आँगन में उतरता है रात का अन्धेरा चुपके से । मे...

और जानिएं »
2:25 pm

क्या ठीक हों जाएगा ? क्या ठीक हों जाएगा ?

जब - बीमार अस्पताल की बीमार खाट पर पडी मेरी बूढ़ी बीमार माँ खांस रही थी बेतहाशा तब महसूस रहा था मैं कि, कैसे - मौत से जूझती है एक आम औरत । ...

और जानिएं »
2:53 pm

प्रेम तकलीफ है .....पर आदमी बनने के लिए जरुरी है तकलीफ से गुजरना ....! प्रेम तकलीफ है .....पर आदमी बनने के लिए जरुरी है तकलीफ से गुजरना ....!

जहां समाप्ति की नियति है वहां हर कर्म क्षणिक और अपने लिए गढ़ा गया हर अभिप्राय भ्रम होता है इसलिए- शुरू की जानी चाहिए मृत्यु से जीवन की बात स...

और जानिएं »
2:33 pm

दौड़ा दी मुहब्बत नस-नस में बंसी के बजाने वाले ने ... दौड़ा दी मुहब्बत नस-नस में बंसी के बजाने वाले ने ...

आज श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के लिए अधिकांश मंदिर सजधज कर तैयार हैं। अधिकांश मंदिरों में 'जय कन्हैया लाल' के जयकारे और 'गिरधर नागर ...

और जानिएं »
5:59 pm

हल्ला हुआ गली दर गल्ली। तिल्ली सिंह ने जीती दिल्ली।। हल्ला हुआ गली दर गल्ली। तिल्ली सिंह ने जीती दिल्ली।।

पुन: स्वागत है आपका परिकल्पना पर मैं यद्यपि बाल कविताएँ और कहानियां लिखता हूँ ऐसे में मेरे आज के उद्बोधन में बाल कविताएँ न हो तो शायद ब...

और जानिएं »
4:16 pm

मैं तुम्हारा हूँ ! मैं तुम्हारा हूँ !

आपका पुन: स्वागत है परिकल्पना पर परिकल्पना की इस अनोखी परिकल्पना को आयामित करने में जिस व्यक्तित्व की बड़ी भूमिका रही है वे हैं आदरणीया श्र...

और जानिएं »
1:53 pm

यह कौन सा ज़माना है ------- शेफाली पांडे की व्यंग्य कविता यह कौन सा ज़माना है ------- शेफाली पांडे की व्यंग्य कविता

पिछले पोस्ट में  आपने शेफाली की व्यंग्य कथा : मजे का अर्थशास्त्र पढ़ा . शेफाली जी मूलत: व्यंग्य प्रस्तुति के लिए जानी जाती हैं वे कहती भी है...

और जानिएं »
4:02 am

विश्व के हर देश में फलित है ये हिंदी ब्लॉग जगत :रेखा श्रीवास्तव विश्व के हर देश में फलित है ये हिंदी ब्लॉग जगत :रेखा श्रीवास्तव

" विश्व के हर देश में देश के हर कोण में, फलित है ये हिंदी ब्लॉग जगत - एक लक्ष्य से जुड़ें सभी व्योम के विस्तार सा संसृति के विचा...

और जानिएं »
11:15 pm

भारतीय मुद्रा की इकाई बनता रुपया और गुमशुदा होता पैसा(एक व्यंग्य)------ दीपक 'मशाल' भारतीय मुद्रा की इकाई बनता रुपया और गुमशुदा होता पैसा(एक व्यंग्य)------ दीपक 'मशाल'

'गरीबों की सुनो... वो तुम्हारी सुनेगा.... तुम एक पैसा दोगे ... वो एक लाख देगा...' कहने की जरूरत नहीं समझ आती की इस गाने का एक...

और जानिएं »
4:05 pm

एक का सिक्का जब हथेलियों में धरा जाता था तो क्या होता था पूछते हो तो सुनो .... एक का सिक्का जब हथेलियों में धरा जाता था तो क्या होता था पूछते हो तो सुनो ....

बचपन पहाडी झरने सा शुद्ध और निर्मल होता है , जीवन सतरंगी झूले सा लगता है-- कहीं कोई चिंता नहीं, अगर कभी उदास हुए भी तो वह एहसास चिड़िया की त...

और जानिएं »
3:05 pm

गुल्लक को फोड़ते उन एक रुपयों की चमक आँखों में उतर आती है गुल्लक को फोड़ते उन एक रुपयों की चमक आँखों में उतर आती है

एक रूपये में होता क्या है ... आज कल एक रुपये मे होता क्या है...मन में ये शब्द दुहराते कही कुछ अटकने लगता है .... एक रूपये का जिक्र आते ही...

और जानिएं »
2:10 pm

हज़ारों हज़ार सिक्के पाकर भी हाथ और मन खाली रह जाते हैं . हज़ारों हज़ार सिक्के पाकर भी हाथ और मन खाली रह जाते हैं .

एक रुपया और मन पीछे... आज में कुछ होगा नहीं और बचपन का क्या कहना ! मासूमियत, स्नेह, और प्यार से लबरेज बचपन समय का वह अनमोल तोहफा है, जो अतुल...

और जानिएं »
12:57 pm

मेरी मान्यताओं को विभक्त करने से पहले अपने पर गौर करो मेरी मान्यताओं को विभक्त करने से पहले अपने पर गौर करो

मेरे अपनों , मैं मोहनदास करमचंद गाँधी, आज आलोचनाओं के गुबार में अदृश्य होता जा रहा हूँ.....पर एक बार पीछे मुड़कर देखो- मैंने सत्य का आग्रह...

और जानिएं »
3:58 pm

अब फिर समय आ गया है एक नयी क्रांति के आगाज का अब फिर समय आ गया है एक नयी क्रांति के आगाज का

आदरणीय मातृभूमि, हार्दिक नमन, तुमसे बिछडे कई दसक बीत गए, लेकिन आत्मा आज भी तुम्हारी गोद में बिताये वात्सल्य से परिपूर्ण लम्हों के आकर्षण स...

और जानिएं »
3:08 pm

हिंदी ब्लॉग पर उत्सव की परिकल्पना, सुनकर सुखद आश्चर्य हुआ : अदम गोंडवी हिंदी ब्लॉग पर उत्सव की परिकल्पना, सुनकर सुखद आश्चर्य हुआ : अदम गोंडवी

रश्मि प्रभा के साथ एक मुलाकात में- प्यार के जाने-माने स्तम्भ इमरोज़ ने कहा, कि- " सुकून उसमें है जो आपके पास है/ और जो मिला हुआ है / ...

और जानिएं »
4:47 pm

परिकल्पना साकार हो...आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' परिकल्पना साकार हो...आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'

पहले दिन उत्सव गीत के अंतर्गत डा. रूप चन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा- "कल्पना का सूर्य मन पर छा गया है। अलख हमको भी जगाना आ गया है।। मात...

और जानिएं »
2:57 pm

यह ब्लाग जगत के इतिहास में अवश्य ही मील का पत्थर साबित होगा : ललित शर्मा यह ब्लाग जगत के इतिहास में अवश्य ही मील का पत्थर साबित होगा : ललित शर्मा

मैं समय हूँ ! मैंने देखा - ब्लोगोत्सव-२०१० का दूसरा दिन -  इस उत्सव की सफलता की कामना कर रहे थे हिंदी के प्रख्यात हास्य-व्यंग्य कवि अशोक...

और जानिएं »
1:59 pm
 
Top