देवता के सामने तडफती मछली ...(समीक्षा)
डॉ. धर्मवीर भारती की पहली पत्नी सुश्री कांता भारती ने तलाक के बाद वैवाहिक जीवन की मुश्किलों पर एक उपन्यास 'रेत की मछली' भी लिखा है। ...
🔽विश्व ब्लॉगकोश से जुड़ें और दर्ज कराएं अंतर्जाल पर अपनी सार्थक उपस्थिति
|
देवता के सामने तडफती मछली ...(समीक्षा)
डॉ. धर्मवीर भारती की पहली पत्नी सुश्री कांता भारती ने तलाक के बाद वैवाहिक जीवन की मुश्किलों पर एक उपन्यास 'रेत की मछली' भी लिखा है। ...
अंग्रेज तो हिन्दुस्तान को आज़ाद छोड़ कर चले गए, लेकिन अपने पीछे हिंदी भाषा को अंग्रेजी का गुलाम बना कर गए!
पुन: स्वागत है आपका - परिकल्पना पर ! ब्रेक पर जाने से पहले आप मुखातिव थे भारतीय नागरिक, अमित केशरी, प्रताप सहगल और सरस्वती जी से .........
" बाबू एक पैसा दे दे ..." गानेवाला भिखारी १० पैसे लौटाने लगा और अब ५ के नोट पर भी घूरता है.
बड़ी अनोखी जादुई दुनिया थी उन दिनों की , जब इकन्नी , , दुअन्नी, और चौअन्नी , अठन्नी का राज था. मेरे स्कूली दिनों की साथी थी इकन्नी ! जो म...
मुंह में गाँधी और बगल में देश की बर्बादी
मेरे देश, मोहनदास करमचंद गाँधी मेरा नाम है. कभी सत्य और अहिंसा का पर्याय मैं, अब सिर्फ असत्य और हिंसक लोगों की जुबान पर रहता हूँ, या फिर पा...
आज पिज्जा एम्बुलेंस से फास्ट पहुंचता है घर :प्रीती मेहता
पुन: स्वागत है आप सभी का परिकल्पना पर . ब्रेक से पहले मैंने आप सभी को आदरणीया सरस्वती जी के विचारों से रूबरू करबाया और अब मैं आपको इसी क्रम ...
जिन्होंने सशस्त्र क्रान्ति द्वारा अंग्रेजों को भारत से बाहर निकालकर स्वराज्य प्राप्ति का सपना देखा, वे कौन थे ?
"........... १८५७ की क्रान्ति भारतीय इतिहास की एक युग परिवर्तनकारी घटना थी। इस क्रान्ति ने लोगों में गुलामी की जंजीरें तोड़ने का साहस प...
साहित्य को पुरस्कृत करना मानवीय संवेदनाओं और अनुभूतियों की पहचान को दर्शाता है।
" पुरस्कारों की समाज में प्राचीनकाल से ही एक लम्बी परम्परा रही है। उत्कृष्ट व सृजनात्मक कार्य को सम्मानित-पुरस्कृत करके जहाँ सम्बन्धित ...
ब्लोगोत्सव-२०१० : बहुत कठिन है डगर पनघट की.....
कुछ ही दिन पूर्व एक विद्वान् लेखक का शोधपूर्ण तकनीकी लेख पढ़ा. “बहुत कठिन है डगर पनघट की”. इस लेख में पाँच तकनीकी बाधाओं का उल्लेख करते हुए ...
ब्लोगोत्सव-२०१० :दर्पण का कार्य तो वस्तु का बिम्ब प्रदर्शित करना है
श्री के० के० यादव का कहना है कि साहित्य के सरोकारों को लेकर आज समाज में एक बहस छिड़ी हुई है। इस संक्रमण काल में कोई भी विधा मानवीय स...
ब्लोगोत्सव-२०१० : ऑनलाइन विश्व की आजाद अभिव्यक्ति है ब्लोगिंग
श्री बालेन्दु शर्मा दाधीच का कहना है कि " ब्लोगिंग ऑनलाईन विश्व की आज़ाद अभिव्यक्ति है " इस विषय पर उनकी राय है कि -...
आईये हिंदी ग़ज़ल की विकास यात्रा पर एक नजर डालते हैं..
मैं समय हूँ ! मैंने इसी गली में ग़ज़ल कहते सुना है ग़ालिब को....मीर को ....दुष्यंत की गज़लें भी इन्हीं गलियों से गुजरती हुई परवान चढ़ी थ...
चिट्ठाकारिता ने हमें एक नया सामाजिक आस्वादन दिया है
"चिट्ठाकारिता ने हमें एक नया सामाजिक आस्वादन दिया. अगर यही रफ़्तार रही तो आने वाले समय में अच्छे लेखको को समाज में आदर भी मिलेगा और इनक...
ब्लोगोत्सव-२०१०: ब्लॉगिंग को परिवर्तन के हथियार के रूप में ढालने की ज़रूरत है
जहां तक हिंदी का संबंध है, साहित्य और चिट्ठाकारिता का एक दूसरे के अभिन्न सहचर्य में ही विकास संभव है ! हिंदी के चर्चित चिट्ठाकार श्री प्रमो...
श्री अरविन्द श्रीवास्तव बता रहे हैं अंतरजाल पर कवियों की विश्राम स्थली कहाँ-कहाँ है ?
मैं समय हूँ ! मैंने हर काल खंड को भोगा है और महसूस की है उस खंड की सृजनात्मकता को ...मेरे पन्नों में दर्ज है हिंदी का पूर्वार्द्ध, उत्तरा...
ग़ज़ल की विकास यात्रा पर एक नज़र
आजकल श्री पंकज सुबीर जी सुबीर संवाद सेवा में पाठकों को ग़ज़ल सिखा रहे हैं , ग़ज़ल के विभिन्न पहलूओं पर उनका पक्ष नि:संदेह प्रशंसनीय है । इस...