एक से बढ़कर एक हैं सब
अच्छा लगता है एक विराम के बाद आना कभी इनसे मिलना कभी उनसे ... एक से बढ़कर एक हैं सब और सबसे बढ़कर रवीन्द्र प्रभात जी , जो देश विदेश से सबक...
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एक से बढ़कर एक हैं सब
अच्छा लगता है एक विराम के बाद आना कभी इनसे मिलना कभी उनसे ... एक से बढ़कर एक हैं सब और सबसे बढ़कर रवीन्द्र प्रभात जी , जो देश विदेश से सबक...
कैकेयी की ख्वाहिश
मैं समय ... सतयुग द्वापर युग और कलयुग .... मैं चलता रहा हूँ , देखता रहा हूँ . सत्य असत्य से परे , सही गलत से परे मैं विभक्त होता रहा ...
ब्लोगोत्सव-२०१० : आज सुनिए अदा जी के स्वर में उनकी एक प्यारी सी कविता
स्वप्न मंजूषा ' अदा ' जी ने ख़ास तौर पर परिकल्पना ब्लॉग उत्सव - २०१० हेतु अपनी कविता के वीडियो भेजे हैं , कविता क...
ब्लोगोत्सव-२०१० : आज उपस्थित है अपनी कविताओं के साथ संगीता सेठी, संगीता स्वरुप और कुलवंत हैप्पी
आज की कविता के सन्दर्भ में एक आलोचक का कहना है कि आज की कविता अपने पाठक खो रही है, क्योंकि उसमें बौद्धिक एकाकीपन बहु...
समकालीन हिंदी काव्य की दिशा-दशा पर......अपनी बात
कहा जाता है कि जब कोई कवि वस्तु जगत में स्थित किसी भाव, घटना या तत्त्व से संवेदित होता है तो वह उसे अपनी समर्थ काव्य भाषा द्वारा सहृदय तक सं...
स्मृतियों की किताब के पन्ने पलटते हुए
अमृता प्रीतम (१९१९-२००५)पंजाबी के सबसे लोकप्रिय लेखकों में से एक थी। पंजाब के गुजराँवाला जिले में पैदा हुईं अमृता प्रीतम को पंजाबी भाषा की प...
ब्लोगोत्सव-२०१०: ब्लॉगिंग को परिवर्तन के हथियार के रूप में ढालने की ज़रूरत है
जहां तक हिंदी का संबंध है, साहित्य और चिट्ठाकारिता का एक दूसरे के अभिन्न सहचर्य में ही विकास संभव है ! हिंदी के चर्चित चिट्ठाकार श्री प्रमो...
ब्लोगोत्सव-२०१० : यह सच है कि बार-बार हार-हार मैं गया !
मैं समय हूँ ! इस अवसर पर आज मुझे याद आ रही है महाप्राण निराला की वो पंक्तियाँ- यह सच है- तुमने जो दिया दान दान वह, हिंदी के हित का ...