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शब्द शब्द में लिपटे ख्यालों की मौन सरसराहट शब्द शब्द में लिपटे ख्यालों की मौन सरसराहट

लहरें कभी हाहाकार करती हैं , कभी शांत आलोड़ित होती हैं .... पर जब वो शांत होती हैं तो भी एक हाहाकार मौन होता है . उनको समझने के लिए उन लह...

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12:58 pm

एक सीमा तक करें शैतानियाँ, ना किसी का दिल दुखाना चाहिए। एक सीमा तक करें शैतानियाँ, ना किसी का दिल दुखाना चाहिए।

धीरे-धीरे यह कार्यक्रम संपन्नता की ओर अग्रसर है श्री राम नरेश त्रिपाठी की बाल कविता के बाद सुप्रसिद्ध गीत-गज़लकार श्री रोहिताश्व अस्थाना ...

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4:46 pm

रश्मि प्रभा जी बता रही हैं कि ध्यान क्या है ? रश्मि प्रभा जी बता रही हैं कि ध्यान क्या है ?

आपका पुन: स्वागत है परिकल्पना पर मैं ललित शर्मा ! आज जो बातें मैं इस मंच से बताने जा रहा हूँ उसे सुनकर चौंक जायेंगे आप ! जी हाँ मैं बात कर...

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5:07 pm

टेंशन लेने का नहीं जी , देने का ....... शशि सिंघल टेंशन लेने का नहीं जी , देने का ....... शशि सिंघल

 आज की भागादौर भरी जिन्दगी में मनुष्य के लिए टेंशन एक अनिवार्य हिस्सा बनती जा रही , घर हो या दफ्तर या फिर कहीं भी जहा आप अपनी भागीदारी सुनिश...

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5:17 am

आत्मा और पैसा : एक दृष्टिकोण आत्मा और पैसा : एक दृष्टिकोण

और अब मैं आपको सुखदेव नारायण की इस कविता से आज के कार्यक्रम की संपन्नता की घोषणा करने जा रही हूँ ...किन्तु उससे पहले आपको बता दूं कि आज श्र...

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5:02 pm

बाल विज्ञान कथा और चिट्ठाकारों की विशेष परिचर्चा बाल विज्ञान कथा और चिट्ठाकारों की विशेष परिचर्चा

आज का कार्यक्रम संपान्नता की ओर अग्रसर है...विगत कई दिनों से बच्चों के लिए उत्सव में कोई कार्यक्रम आयोजित नहीं हो पाया, इसलिए आज  मैं केवल ब...

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5:04 pm

प्यार करना हो तो बिना किसी शर्त के, देना हो तो बिना किसी प्राप्य की उम्मीद के : सुमन सिन्हा प्यार करना हो तो बिना किसी शर्त के, देना हो तो बिना किसी प्राप्य की उम्मीद के : सुमन सिन्हा

स्वागत है आप सभी का पुन: परिकल्पना पर , ब्रेक से पहले मैं मिलवा चुकी हूँ आपको हिंदी ब्लोगिंग के कई महत्वपूर्ण हस्ताक्षरों से , किन्तु अब मैं...

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4:43 pm

समय की गतिशील धुरी पर परिकल्पना ने त्रिकाल दर्शन करवा दिए :सरस्वती प्रसाद समय की गतिशील धुरी पर परिकल्पना ने त्रिकाल दर्शन करवा दिए :सरस्वती प्रसाद

आशीर्वचन के दो शब्द सुना है --- श्यामल आकाश की सौरभमई मिट्टी पर ही कल्पना के कुसुम खिलते हैं, कोई अज्ञात प्रेरणा मन की बाहें  थामकर चाँद स...

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4:53 pm

किसी उपनिषद की तरह है यह परिकल्पना : इमरोज़ किसी उपनिषद की तरह है यह परिकल्पना : इमरोज़

आशीर्वचन के दो शब्द   अपने आप को गीत गाने दो अपने आप को सुनने दो हम काफी हैं अपना आप गाने के लिए और अपना आप सुनने के लिए किसी उपनिषद ...

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4:46 pm
 
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