हमारे मध्य एक टुकड़ा धुप का माही के नाम ...
माही .... दूर तक उनके स्वर जो मुखरित हैं उसकी दास्ताँ मैं सुनाउंगी ... कहती हैं माही, मै वहां हूं जहां से मुझे अपनी ही खबर नहीं आत...
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हमारे मध्य एक टुकड़ा धुप का माही के नाम ...
माही .... दूर तक उनके स्वर जो मुखरित हैं उसकी दास्ताँ मैं सुनाउंगी ... कहती हैं माही, मै वहां हूं जहां से मुझे अपनी ही खबर नहीं आत...
हो जाये तो क्या बात है ...
आइये आज बिना किसी भूमिका के मैं आपको उनलोगों से मिलाऊं जो शायद आपको देखन में छोटन लगे पर घाव करें गंभीर ..... खिलखिलाती हंसी सी सुनीता...