ब्लॉगोत्सव-२०१४, कहने को ,सुनाने को और था, लेकिन .... १ (समापन) ब्लॉगोत्सव-२०१४, कहने को ,सुनाने को और था, लेकिन .... १ (समापन)

दो बुलबुले आँखों के मुहाने से बादलों की तरह ख़्वाबों की दुनिया बनाते हैं .... ये ख़्वाबों की दुनिया कितनी अच्छी लगती है ! न कहीं जाना...

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10:00 am

ब्लॉगोत्सव-२०१४ का  एतिहासिक समापन कार्यक्रम.... ब्लॉगोत्सव-२०१४ का एतिहासिक समापन कार्यक्रम....

ब्लॉगोत्सव-२०१४ का   एतिहासिक समापन कार्यक्रम    दिनांक:05.07.2014  सुबह 10.00 बजे: कहने को, सुनाने को और था, लेकिन....प्रवीण...

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10:41 am

ब्लॉगोत्सव-२०१४, अट्ठाइसवाँ दिन, मैं' … ??? ब्लॉगोत्सव-२०१४, अट्ठाइसवाँ दिन, मैं' … ???

मैं रहती हूँ अपने 'मैं' के साथ  क्योंकि अक्सर  जब हाथ को हाथ नहीं सूझता  यह 'मैं' मेरे साथ मुझे राह बताता...

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3:00 pm

ब्लॉगोत्सव-२०१४, अट्ठाइसवाँ दिन, आज इस रंगमंच पर - चलो तुमको लेकर चलें .... ब्लॉगोत्सव-२०१४, अट्ठाइसवाँ दिन, आज इस रंगमंच पर - चलो तुमको लेकर चलें ....

नई पीढ़ी भी पुराने गानों में बँधती हैँ, और तब उनकी पसंद के आगे सोचना होते है क़ि अभी पिक्चर बाकी है  .... ठीक उसी तरह एक बार आराम से ब्ल...

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1:00 pm
 
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