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विचारों से बहुत मजबूत थे, दमदार थे मुद्रा। विचारों से बहुत मजबूत थे, दमदार थे मुद्रा।

बड़े ज़िद्दी, बड़े निडर, बड़े खुद्दार थे मुद्रा हमारे बीच के फिक्रमंद फनकार थे मुद्रा। उन्हें इन मील के पत्थरों से क्या मतलब- ज...

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2:39 pm

रवीन्द्र प्रभात ने सबकी उम्मीदें जगायी..... वरिष्ठ कथाकारों की राय रवीन्द्र प्रभात ने सबकी उम्मीदें जगायी..... वरिष्ठ कथाकारों की राय

कल दिनांक 29.10.2013 को लखनऊ के क़ैसरबाग स्थित जयशंकर प्रसाद सभागार में मेरे उपन्यास धरती पकड़ निर्दलीय की जमकर चर्चा हुयी। सभा के अध्यक्ष...

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2:23 pm

किस बात की चर्चा करें आज के परिवेश मेँ ? किस बात की चर्चा करें आज के परिवेश मेँ ?

आज हरिभूमि के पेज चार पर ........ 

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9:35 am

एक श्रमिक की व्यथा एक श्रमिक की व्यथा

जब बीमार होता कोई सेठ जरूरत महसूस नही होती ओझा- गुणी की नीम-हकीम से भी ठीक नही होते सेठ दुआएं नही भाती उसे अपने मजदूरों की ...

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10:43 am
 
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