मुस्कुराहट बनाए रक्खो : रवीन्द्र प्रभात
।। ग़ज़ल।। - रवीन्द्र प्रभात गमजदा है माहौल बहुत आहट बनाए रक्खो। बच्चों के लिए अपनी मुस्कुराहट बनाए रक्खो। भूख से लड़कर ...
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मुस्कुराहट बनाए रक्खो : रवीन्द्र प्रभात
।। ग़ज़ल।। - रवीन्द्र प्रभात गमजदा है माहौल बहुत आहट बनाए रक्खो। बच्चों के लिए अपनी मुस्कुराहट बनाए रक्खो। भूख से लड़कर ...
विचारों से बहुत मजबूत थे, दमदार थे मुद्रा।
बड़े ज़िद्दी, बड़े निडर, बड़े खुद्दार थे मुद्रा हमारे बीच के फिक्रमंद फनकार थे मुद्रा। उन्हें इन मील के पत्थरों से क्या मतलब- ज...
मातमी धुन पर थिरकती हुई खुशी तलाश करो !
ग़ज़ल हो गयी नंगी व्यवस्था , सादगी तलाश करो ! पत्थरों के शहर में एक आदमी तलाश करो !! पर्यावरण के नाम पर कर दिए लाखों खरच- खो गयी है गा...
आप ऐसे थे नहीं बेवक्त कैसे हो गए ?
बहुत दिनों के बाद मेरे जेहन की कोख से फूटी है एक ग़ज़ल, पढ़ना चाहेंगे आप ? ग़ज़ल बिन पिए शराब यूं मदमस्त कैसे हो गए ? आप ऐसे थे नहीं बेवक...
खेल खेल सा खेल खिलाड़ी !
खेल खेल सा खेल खिलाड़ी, सबसे रख तू मेल खिलाड़ी ! नियम बने हैं बाती- भाँति, खेल है दीपक, तेल खिलाड़ी ! बन्दर के हांथों में मत दे, मीठे-...
ग़ज़ल: अब न हो शकुनी सफल हर दाव में ...!
भर दे जो रसधार दिल के घाव में , फ़िर वही घूँघरू बंधे इस पाँव में ! द्रौपदी बेवस खड़ी कहती है ये - अब न हो शकुनी सफल हर दाव में ! बर्तनों की बा...
ग़ज़ल: घर को ही कश्मीर बना !
कैनवस पर अब चीड़ बना , घर को ही कश्मीर बना । सत्ता के दरवाजे पर ना - बगुले की तसवीर बना । झूठ-सांच में रक्खा क्या - मेहनत कर तकदीर बना । रो...
कुछ मतलब की बातें शराब के बहाने, ग़ज़ल के माध्यम से ...!
कहते हैं शराब, लोग या तो ग़म को भूलने या फिर ख़ुशी मनाने के लिए पीते हैं।वैसे सच तो यह है कि पीने वालों को पीने का बहाना चाहिए। शराब के सन्द...
तंग चादर है जिसकी वही , सो रहा तानकर रात में ....!
फोटो : दैनिक भाष्कर से साभार हादसे दर -ब - दर रात में , आप हैं बेखबर रात में । दिन में रिश्वत निगल जो गया - बन गया नामवर रात में । ...
चीखते-बोलते बेहिचक , आदमी बेजुवां देखिए !
हरतरफ हादसा देखिए ! देश की दुर्दशा देखिए !! क्षेत्रवादी करे टिप्पणियाँ - देश का रहनुमा देखिए !! लक्ष्य को देख करके कठिन- कांपता नौजवां ...
यह पता चलता नही अब कौन किसका बाप है !
आजकल के माहौल पर अपनी संवेदनाओं को प्रदर्शित करने के कई माध्यम हैं, आप चाहें तो लंबा चिट्ठा भी तैयार कर सकते हैं और महज सात शब्दों के हाईकू...
आप कहते हो मियाँ सब छोड़ दो भगवान पर ?
विगत एक सप्ताह के अपने अनुभवों को बांटने में यदि गद्य का सहारा लिया जाए तो काफ़ी समय की जरूरत होगी , तो मैंने सोचा कि क्यों न आज उस बात की च...
हर तरफ़ संत्रास अब मैं क्या करूं आशा ?
छल रहा विश्वास अब मैं क्या करूं आशा ? हर तरफ़ संत्रास अब मैं क्या करूं आशा ? दर्द का है साज, कोई अब तरन्नुम दे- कह रहा मधुमास अब मैं क्या ...
सर्दी के बहाने कुछ मतलब की बातें ग़ज़ल के माध्यम से
ओस के कतरे बदन को धो गए आशा , आंच दे कुछ सर्द मौसम हो गए आशा ! देखना धीरे से आना पास मेरे तुम , रेत के थे फर्श फिशलन हो गए आशा ! हो गयी इत...
!! मोगैम्बो खुश हुआ !!
बिक गया स्वाभिमान सस्ते में, मोगैम्बो खुश हुआ ! देश और सम्मान सस्ते में, मोगैम्बो खुश हुआ !! ऐसी लड़ी है आंख पश्चिम से कि देखो खो गयी- मनमोह...
फटी लंगोटी झोपड़पट्टी है लेकिन , जीवन का उल्लास हमारे पास मियाँ !
पिछले दिनों मियाँ मुसर्रफ के द्वारा पाकिस्तान में आपात स्थिति लगाने की खूब चर्चा रही . लोगों ने मियाँ मुसर्रफ के किसी भी हद तक जाने की बात क...
एक कतरा जिन्दगी जो रह गयी है, घोल दे सब गंदगी जो रह गयी है ।
गज़ल - एक कतरा जिन्दगी जो रह गयी है , घोल दे सब गंदगी जो रह गयी है। भीख देगा कौन तुझको, ये बताना- तुझमें ये आवारगी जो रह गयी है ? आंख से आँस...
आस्तिनों में संभलकर सांप पाला कीजिये !
ज़िंदगी के श्वेत पन्नों को न काला कीजिये आस्तिनों में संभलकर सांप पाला कीजिये। चंद शोहरत के लिए ईमान अपना बेचकर - हादसों के साथ खुदको मत उछा...
आज अपने आप में क्या हो गया है आदमी ......!
आज अपने आप में क्या हो गया है आदमी , जागने का वक़्त है तो सो गया है आदमी । भूख की दहलीज़ पर जगता रहा जो रात- दिन , चंद रोटी खोजने में खो गया ...