मुस्कुराहट बनाए रक्खो : रवीन्द्र प्रभात
।। ग़ज़ल।। - रवीन्द्र प्रभात गमजदा है माहौल बहुत आहट बनाए रक्खो। बच्चों के लिए अपनी मुस्कुराहट बनाए रक्खो। भूख से लड़कर ...
🔽विश्व ब्लॉगकोश से जुड़ें और दर्ज कराएं अंतर्जाल पर अपनी सार्थक उपस्थिति
|
मुस्कुराहट बनाए रक्खो : रवीन्द्र प्रभात
।। ग़ज़ल।। - रवीन्द्र प्रभात गमजदा है माहौल बहुत आहट बनाए रक्खो। बच्चों के लिए अपनी मुस्कुराहट बनाए रक्खो। भूख से लड़कर ...
बड़ा ज़िद्दी बड़ा निडर बड़ा खुद्दार है वह ...
(ग़ज़ल ) बड़ा ज़िद्दी बड़ा निडर बड़ा खुद्दार है वह इसलिए शायद अलग-थलग इसपार है वह । रात को दिन और दिन को रात कैसे कहे- यार जब राजनेता नहीं फनका...
.....और तुम हो !
कभी-कभी स्मृतियों में झांकना कितना सुखद और रोमांच से परिपूर्ण होता है , इसका अंदाजा मुझे तब हुआ जब आज अचानक डा0 रोहिताश्व अस्थाना द्वारा संप...
ग़ज़ल को फ़कत जज़्बात मत कहना ।
ग़ज़ल लफ़्ज तोले बिना बात मत कहना दिन को खामखाह रात मत कहना । दर्द है, नसीहत है, तजुर्बा भी- ग़ज़ल को फ़कत जज़्बात मत कहना । जिंदगी एक सफ़र है...
अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपनी भारत यात्रा की शुरुआत मुंबई हमलों में मारे जाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दे कर की और मुंबई को भारत ...
मौत दे दे मगर जग हंसाई न दे ।
(ग़ज़ल ) कद ये छोटा लगे कुछ दिखाई न दे रब किसी को भी ऐसी ऊँचाई न दे । मुफलिसों को न दे बेटियाँ एक भी - मौत दे दे मगर जग हंसाई न दे । रात कर ...
पराये शहर में इक हमजुबां हमराज पाया
(ग़ज़ल ) पराये शहर में इक हमजुबां हमराज पाया समंदर लांघने की तब कहीं परवाज़ पाया । सड़क के पत्थरों को देख करके यार मैंने- समय के साथ जीने का ...
पटाखे फोड़कर क्यूं नोट जलाएं बाबू जी ?
कल दीपावली का त्यौहार था, मैंने अपनी बड़ी बिटिया उर्विजा से पूछा कि पटाखे नहीं फोड़ने हैं क्या ? उसने तपाक से कहा पापा ! पटाखे फोड़कर रुपयों ...
हिम्मत बुलंद है तो मिलेगी तुम्हें मंजिल....
(ग़ज़ल ) जीना है एक-एक पल टटोलकर जियो जब तक जियो प्रभात जिगर खोलकर जियो । हिम्मत बुलंद है तो मिलेगी तुम्हें मंजिल- कदमों को मगर नापकर व तोलक...
शर्म की पोशाक को वह छोड़ करके आ गया
(ग़ज़ल ) शर्म की पोशाक को वह छोड़ करके आ गया वेबसी की एक चादर ओढ़ करके आ गया । रक्त पीकर वह मनुज का कह रहा है शान से- रहगुजर में दो दिलों ...
करते हो क्यूँ न पहल तौबा-तौबा ।
दो गज़लें (एक) है अचंभित हवा ये पहल देखकर ताश के जो बने हैं महल देखकर । कंपकंपी सी हुई और शहर रो पडा- इस जमाने का रद्दोबदल देखकर । मैंने...
आपकी नाराजगी जो रह गयी है ।
ग़ज़ल : एक कतरा जिंदगी जो रह गयी है घोल दे सब गन्दगी जो रह गयी है । भीख देगा कौन , मुझको ये बताओ- तुझमें ये आवारगी जो रह गयी है । आंख से आंस...
सस्ती कितनी जान हमारी बस्ती में ।
ग़ज़ल: कुछ सूखे जलपान हमारी बस्ती में सुपली भर है धान हमारी बस्ती में । हवा देखकर आज यहाँ शर्मिन्दा है- टूटे छप्पर-छान हमारी बस्ती में । पुत...
चकला - चकला घूम रहे ढूंढ रहे हैं प्यार
ग़ज़ल शीशमहल हैं शीशे के वो पत्थर के हैं द्वार , कैसे - कैसे लोग बसे हैं महानगर में यार राधा द्वारे राह निहारे, फिर भी मोहन प्यारे- चकला - च...
आईये हम मुल्क में सोच यह विकसित करें...
गांधी जयंती पर विशेष : आईये हम मुल्क में सोच यह विकसित करें एक व्यक्ति एक को हर रोज हीं शिक्षित करे । नौजवां के हाथ में केवल नहीं हो डिग्रिय...
जिंदगी के मायने समझ जाओगे ।
हंसोगे, रोओगे, गुनगुनाओगे जिंदगी के मायने समझ जाओगे । मिल जायेगी मोती तुम्हे भी तब- जब समुद्र में गहरे उतर जाओगे । माँ कहती है कि अक्ल आ जाय...
स्वार्थ के दांत कितने नुकीले हो गए हैं हम सांप से ज्यादा जहरीले हो गए हैं । हर कोई समझने में करने लगा है भूल- क्योंकि हमारे आवरण चमकीले हो...
राजपथ पर बुत बने हैं राम क्यों ?
ग़ज़ल : मच रहा है मुल्क में कोहराम क्यों , राजपथ पर बुत बने हैं राम क्यों ? रोज आती है खबर अखवार में , लूट, हत्या , ख़ौफ , कत्लेयाम क्यों ?...
सही तैराक हो तो धार से नफरत नहीं करता.....
ग़ज़ल : किसी दरिया,किसी मझदार से नफरत नहीं करता सही तैराक हो तो धार से नफरत नहीं करता । यक़ीनन शायरी का इल्म जिसके पास होता वह - क...
मंदिर-मस्जिद मुद्दों में बस खो गया है आदमी ।
ग़ज़ल आज अपने आप में क्या हो गया है आदमी , जागने का वक़्त है तो सो गया है आदमी । भूख की दहलीज़ पर जगता रहा जो रात- दिन , चंद रोटी खोजने में ख...