परिकल्पना और कुछ एहसास (भावना तिवारी) परिकल्पना और कुछ एहसास (भावना तिवारी)

सपने देखो तो ज़रूर समझो सपनों की भाषा निश्चित तुमको मिलेगी मंजिल पूरी होगी आशा ! सपने साथ में हैं गर तेरे तू मजबू...

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10:00 am

परिकल्पना और कलम परिकल्पना और कलम

कलम, आज उनकी जय बोल -रामधारी सिंह दिनकर जला अस्थियां बारी-बारी, चटकाई जिनमें चिंगारी, जो चढ़ गये पुण्यवेदी पर, ...

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10:00 am

परिकल्पना और कविता  परिकल्पना और कविता

जो हम जीते नहीं,उसे लिख पाना कठिन है ! कवि - कविता लिखने से नहीं होता कोई  यूँ ही नहीं कहा प्रकृति कवि पन्त ने  "वियोगी होगा पह...

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10:00 am

परिकल्पना और समीक्षा - (कुछ पुराने कुछ नए) परिकल्पना और समीक्षा - (कुछ पुराने कुछ नए)

पूर्व में फ़िल्में पंचतंत्र की कहानियों के समान एक शिक्षा देने का उत्तम साधन थीं  . यूँ भी बच्चों को गिनी-चुनी फ़िल्म ही देखने को मिलत...

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10:30 am

परिकल्पना और दीवाली की जगमगाती शुभकामनाएँ आप सबको परिकल्पना और दीवाली की जगमगाती शुभकामनाएँ आप सबको

बहुत सी शिकायतें भरी थीं मन में  साफ़ कर दिया है उन्हें  दीये में मुस्कान की बाती डाल  बातों से भर दिया है  सारे चेहरे जगमगाने...

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11:12 am
 
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