परिकल्पना - बीते पलों के साथ बालकनी में परिकल्पना - बीते पलों के साथ बालकनी में

ब्लॉग लिखना एक संग्रह से कम नहीं था  … पर फेसबुक के साथ ब्लॉग का लेखन पाठक विहीन हो गया - तो फेसबुक को ब्लॉग का पर्याय मानना पड़ा।  हर...

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10:30 am

परिकल्पना - प्यार दिशा निर्मित करती एक हथेली है परिकल्पना - प्यार दिशा निर्मित करती एक हथेली है

प्यार कभी क़र्ज़ नहीं होता  जिसे चुकाया जा सके  या जिसका कोई हिसाब किताब हो ! प्यार दिशा निर्मित करती हथेली है  जो मुट्ठी को था...

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10:30 am

परिकल्पना - तुम बहुत अच्छी हो माँ परिकल्पना - तुम बहुत अच्छी हो माँ

माँ, तुमने अपनी आदतों से  समझौता,सहनशीलता,चुप रहने की खासियत बताई  पर, जब सूरज माथे पर होता है  दूर दूर तक जल से भरा एक टुक...

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10:30 am

परिकल्पना - संस्कृत एवं हिन्दी परिकल्पना - संस्कृत एवं हिन्दी

कितनी अजीब हास्यास्पद बात है -  जब कोई विदेशी हिन्दी में बोलता है  तो हम खुश हो जाते हैं  उनकी टूटी फूटी हिन्दी हमारे लिए उद...

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10:30 am

परिकल्पना - खतरनाक क्या है !? परिकल्पना - खतरनाक क्या है !?

खतरनाक क्या है !?  वह जिससे हम डर जाते हैं अचानक  या जो धीरे धीरे हमारा अस्तित्व मिटाता है ?  ....  रश्मि प्रभा  मिलते ...

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10:10 am

परिकल्पना - लोग क्या कहेंगे ! परिकल्पना - लोग क्या कहेंगे !

लोग क्या कहेंगे?" यह एक बेड़ी है -  जिसे सब कहीं न कहीं पहन लेते हैं  और मूक हो जाते हैं ! सत्य आग्नेय स्वर में चीखता है ...

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10:30 am

परिकल्पना - अदृश्य कवच परिकल्पना - अदृश्य कवच

मेरे अपने कुछ वुसूल हैं  … मैं सुख में भी सुमिरन करती हूँ।  ज़रूरी नहीं कि मैं थाल सजाके मंदिर मंदिर जाऊँ  या रोज घी का दीया जल...

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10:30 am

परिकल्पना - तुम्हारा देव परिकल्पना - तुम्हारा देव

"तुम्हारा देव" हृषीकेश वैद्य जी के द्वारा लिखित खतों का एक अंतहीन सिलसिला है  …  जी हाँ, अंतहीन सिलसिला प्रेम का, अनकही ब...

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10:30 am

परिकल्पना - माँ परिकल्पना - माँ

पापनाशिनी गंगा की मानिंद  तुमने जीवन को जीया  औरों के किये को  आत्मसात किया  साथ ही हमारी ज़िन्दगी के कचरे भी  अपने भीतर जब्त...

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10:30 am
 
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