अपाहिजों के खेल में अंधे तमाशबीन अपाहिजों के खेल में अंधे तमाशबीन

अगली सदी के हैं ये ख़्वाब बेहतरीन अपाहिजों के खेल में अंधे तमाशबीन तारीफ़ यूँ करेंगे गूंगे भी बेहिसाब- संसद करेगा पागलों की बात पर यकीन भैंस स...

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1:39 pm

ब्लोगिंग में अनुशासन का महत्व .... ब्लोगिंग में अनुशासन का महत्व ....

पिछले पोस्ट में मैंने ब्लॉग की व्याख्या प्रस्तुत की थी । उसी क्रम में आज प्रस्तुत है ब्लोगिंग में अनुशासन का महत्व । जैसा कि आप सभी को विदि...

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11:22 am

आप ब्लॉग क्यों लिखते हैं ? आप ब्लॉग क्यों लिखते हैं ?

राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद, नई दिल्ली (भारत सरकार) और तस्लीम, लखनऊ द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित, 'ब्लॉग लेखन के द्वा...

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12:38 pm

एक नज़र इधर भी ... एक नज़र इधर भी ...

परिकल्पना पर आज : '' हो गयी हर घाट पर पूरी व्यवस्था , शौक़ से डूबें जिसे भी डूबना है '' हो गयी हर घाट पर पूरी व्यवस्था , शौक़...

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1:57 pm

'' हो गयी हर घाट पर पूरी व्यवस्था , शौक़ से डूबें जिसे भी डूबना है '' '' हो गयी हर घाट पर पूरी व्यवस्था , शौक़ से डूबें जिसे भी डूबना है ''

'' हो गयी हर घाट पर पूरी व्यवस्था , शौक़ से डूबें जिसे भी डूबना है '' दुष्यंत ने आपातकाल के दौरान ये पंक्तियाँ कही थी , तब श...

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1:03 pm

परिकल्पना समूह : एक विहंगावलोकन परिकल्पना समूह : एक विहंगावलोकन

परिकल्पना पर आज : गुरु बिनु ज्ञान कहाँ जग माही.... आज शिक्षक दिवस है। दिवसों की भीड़ में एक और दिवस.......! गुरु, शिक्षक, आचार्य, उस्ताद,...

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12:26 pm

गुरु बिनु ज्ञान कहाँ जग माही.... गुरु बिनु ज्ञान कहाँ जग माही....

आज शिक्षक दिवस है। दिवसों की भीड़ में एक और दिवस.......! गुरु, शिक्षक, आचार्य, उस्ताद, अध्यापक या टीचर ये सभी शब्द एक ऐसे व्यक्ति को व्याख्य...

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7:59 am

परिकल्पना समूह : एक विहंगावलोकन परिकल्पना समूह : एक विहंगावलोकन

वटवृक्ष पर आज : प्यार ज़िन्दगी कहाँ से शुरू होती है , उस रुदन से, जब माँ के गर्भनाल से अलग होता है बच्चा , या वहाँ से जब माँ के अन्दर एक धड...

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2:36 pm

वजह क्या है ? वजह क्या है ?

भूख-वहशी , भ्रम -इबादत वजह क्या है हो गयी नंगी सियासत , वजह क्या है ? मछलियों को श्वेत बगुलों की तरफ से - मिल रही क्या खूब दावत , वजह क्या ह...

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1:30 pm

बहुप्रतीक्षित वटवृक्ष का शुभारंभ बहुप्रतीक्षित वटवृक्ष का शुभारंभ

कहते हैं समय ठहरता नहीं , मौसम बदलते हैं , तेवर बदलते हैं , चाँद भी पूर्णता से परे होता है और अमावस की रात आती है ... यूँ कहें अमावस जीवन का...

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12:34 pm
 
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