कवि बच्चन की पंक्तियाँ और उसे छूकर उभरते ख्याल ... कवि बच्चन की पंक्तियाँ और उसे छूकर उभरते ख्याल ...

पितृ पक्ष में पुत्र उठाना अर्घ्य न कर में, पर प्याला बैठ कहीं पर जाना, गंगा सागर में भरकर हाला किसी जगह की मिटटी भीगे, तृप्ति मुझे मिल जाए...

और जानिएं »
11:05 am

उम्र से न सपने आंके जा सकते हैं , न सपनों को पिरोने की कला उम्र से न सपने आंके जा सकते हैं , न सपनों को पिरोने की कला

'जिन खोजा तिन्ह पाइया गहरे पानी पैठ जो बुरा डूबन डरा रहा किनारे बैठ '..... नहीं डरता मैं , तभी आपकी आँखों से जो रह गए ओझल उनको क...

और जानिएं »
12:23 pm

कुछ उनकी कुछ इनकी .... कुछ उनकी कुछ इनकी ....

आज मेरे हाथों में दो पोटलियाँ हैं - कुछ कल के एहसास , कुछ आज के . मैं कल भी था मैं आज भी हूँ , यही तो हर पल कहता आ रहा हूँ . बस चेहरे...

और जानिएं »
11:03 am

प्यारे बच्चे उमर के कच्चे जीवन की एक बात सुनाऊं प्यारे बच्चे उमर के कच्चे जीवन की एक बात सुनाऊं

आओ आओ होनहारों प्यारे बच्चे उमर के कच्चे जीवन की एक बात सुनाऊं ... मुसीबतों से डरो नहीं बुजदिल बनके मरो नहीं , रोते रोते क्या है जीना नाच...

और जानिएं »
2:02 pm
 
Top