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दहशत....! दहशत....!

दहशत (लघु कथा) उनका नाम हंसमुख था,पर चेहरे पर हंसी का का नामो निशान नहीं होता था | मेरे साथ कॉलेज में व्याख्याता थे हिंदी पढ़ाते थे .क...

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12:17 pm

समय कहता है - समय कहता है -

मैं समय हूँ , कहीं और जाऊँ इस उत्सव को छोडकर - ? सूरज ले ही आया हूँ , पंछियों का कलरव है ही हर तरफ ... सब अपने अपने काम में लग ही चुके ...

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10:45 am

ब्लोगोत्सव-२०१० :आज के कार्यक्रम की सम्पन्नता ब्लोगोत्सव-२०१० :आज के कार्यक्रम की सम्पन्नता

कल अविनाश वाचस्पति जी ने सुझाया कि अब कार्यक्रम का समापन न किया जाए , क्योंकि यह कार्यक्रम निरंतर सोपान की ओर अग्रसर है . समापन शब्द अवरोध प...

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4:58 pm

श्रेष्ठ पोस्ट श्रृंखला के अंतर्गत आज श्री रवि रतलामी का आलेख श्रेष्ठ पोस्ट श्रृंखला के अंतर्गत आज श्री रवि रतलामी का आलेख

आज हिन्दी ब्लॉगिंग अत्यंत संवेदनात्मक दौर में पहुँच चुकी है ...हम तरह-तरह के उपायों के साथ हिन्दी को आयामित करने की दिशा में अग्रसर हैं , क...

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4:40 pm

कविता में छिपे दर्द को महसूस करने के लिए आईये चलते हैं.... कविता में छिपे दर्द को महसूस करने के लिए आईये चलते हैं....

निर्मला कपिला जी के बाद आईये उस युवा कवि की कविताओं को आत्मसात करते हैं जिन्हें हिंदी चिट्ठाजगत केवल डेढ़ वर्षों से जानता है । डेढ़ वर्षों क...

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1:59 pm

ब्लोगोत्सव-२०१० : आईये अब ज़रा काव्य की ओर मुड़ते हैं ब्लोगोत्सव-२०१० : आईये अब ज़रा काव्य की ओर मुड़ते हैं

चिट्ठाकारी में अपनी सार्थक सक्रियता से पूरे ब्लॉगजगत को अचंभित कर देने वाली महिलाओं में सर्वाधिक अग्रणी चिट्ठाकारा हैं श्रीमती निर्मला कपिल...

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1:05 pm

ब्लोगोत्सव-२०१० : मैंने देखा है  बीसवीं सदी का पूर्वार्द्ध ब्लोगोत्सव-२०१० : मैंने देखा है बीसवीं सदी का पूर्वार्द्ध

मैं समय हूँ ! मैंने देखा है बीसवीं सदी का पूर्वार्द्ध जो छायावादी कवियों का उत्थान का काल था ...उसी समय अल्मोड़ा निवासी सुमित्रानंदन पंत नय...

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12:07 pm

ब्लोगोत्सव-२०१० तीसरे दिन के कार्यक्रम में आपका स्वागत है ब्लोगोत्सव-२०१० तीसरे दिन के कार्यक्रम में आपका स्वागत है

मैं समय हूँ ! देख रहा हूँ ...निरंतर गिरते जा रहे मानव-मूल्यों को भाषा- अप संस्कृति के इस दौर में ...! अंग्रेजी माहौल में पनप रही पीढ़ी के बु...

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10:38 am
 
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