फागुन के संग पतझड़ आया बहुत दिनों के बाद .....!
फ़िर एक बार लोक सभा चुनाव के बहाने सरगर्मी तेज हो गयी है , हर दल अपने-अपने ढंग से चुनावी जोड़-तोड़ में व्यस्त है । पिछले दिनों लखनऊ से समाजवाद...
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फागुन के संग पतझड़ आया बहुत दिनों के बाद .....!
फ़िर एक बार लोक सभा चुनाव के बहाने सरगर्मी तेज हो गयी है , हर दल अपने-अपने ढंग से चुनावी जोड़-तोड़ में व्यस्त है । पिछले दिनों लखनऊ से समाजवाद...
प्यार में दूरियां ठीक है ...!
दर्द में सिसकियाँ , ठीक है - ठीक है याद में हिचकियाँ , ठीक है- ठीक है पर विवशता नही हो कभी प्यार में - प्यार में दूरियां , ठीक है-ठीक है ! ...
देश को अब चाहिए खुशनुमा सा एक प्रभात !
अनुभवों का फ़िर नही कोई बहाना चाहिए , सोच जिसमें है नई वह आजमाना चाहिए । थक गए हैं जो सफर में दीजिये आराम उनको- एक इंजन जोश से लबरेज आना चाहि...
उसी बापू को मेरा फ़िर नमन आज श्रद्धा का यारों ।
(शहीद दिवस पर विशेष ) जहाँ पे खुशनुमा गुल से सजा हो गुलिस्तां यारों समझ लेना वही है गांधी का हिन्दुस्तां यारों । हमेशा अम्न के ही वास्ते...
भारतीय गणतंत्र का ६० वें वर्ष में प्रवेश , मुबारक हो मेरे देश !
सर पे हिमालय का मुकुट चरणों में सागर है , ज़रा नजदीक से देखो हंसी भारत का मंजर है । सभी को प्यार से पानी पिलाने की मेरी तहजीब- मेरे पुरखों का...
वर्ष-2008 : हिन्दी चिट्ठा हलचल (भाग-11)
"रोज गिर जाती है दीवार तेरे वादों की रोज हम मौत के साए में रहा करते हैं!" बस यही है सच्चाई हमारे समाज की, लेकिन इस समाज में कुछ ऐ...
वर्ष-2008 : हिन्दी चिट्ठा हलचल (भाग-10)
हिन्दी चिट्ठा हलचल - २००८ अब समापन की ओर तेजी से अग्रसर है, किंतु जो महत्वपूर्ण विषय अभी तक छूटे हुए हैं उसके बिना इस महायज्ञ की पूर्णाहुति...
वर्ष-2008 : हिन्दी चिट्ठा हलचल (भाग- 9)
अब हम जिस ब्लॉग की चर्चा करने जा रहे हैं उसका नाम है “ प्राइमरी का मास्टर “ जी हाँ मास्टर साहब हैं उत्तर प्रदेश के फतेहपुर के प्रवीण त्रिवे...
वर्ष-2008 : हिन्दी चिट्ठा हलचल (भाग- 8)
आज मैं जिन चिट्ठों की चर्चा करने जा रहा हूँ, वह चिट्ठा है तो विषय आधारित हीं, मगर मुझे उन चि...
वर्ष-2008 : हिन्दी चिट्ठा हलचल (भाग- 7)
किसी ने खूब ही कहा है- "हँसना रवि की प्रथम किरण सा, कानन मेंनवजात शिशु सा ।" हमारा ...