ब्लोगोत्सव-२०१० : आज उपस्थित है अपनी कविताओं के साथ संगीता सेठी, संगीता स्वरुप और कुलवंत हैप्पी
आज की कविता के सन्दर्भ में एक आलोचक का कहना है कि आज की कविता अपने पाठक खो रही है, क्योंकि उसमें बौद्धिक एकाकीपन बहु...
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ब्लोगोत्सव-२०१० : आज उपस्थित है अपनी कविताओं के साथ संगीता सेठी, संगीता स्वरुप और कुलवंत हैप्पी
आज की कविता के सन्दर्भ में एक आलोचक का कहना है कि आज की कविता अपने पाठक खो रही है, क्योंकि उसमें बौद्धिक एकाकीपन बहु...
समकालीन हिंदी काव्य की दिशा-दशा पर......अपनी बात
कहा जाता है कि जब कोई कवि वस्तु जगत में स्थित किसी भाव, घटना या तत्त्व से संवेदित होता है तो वह उसे अपनी समर्थ काव्य भाषा द्वारा सहृदय तक सं...
स्मृतियों की किताब के पन्ने पलटते हुए
अमृता प्रीतम (१९१९-२००५)पंजाबी के सबसे लोकप्रिय लेखकों में से एक थी। पंजाब के गुजराँवाला जिले में पैदा हुईं अमृता प्रीतम को पंजाबी भाषा की प...
ब्लोगोत्सव-२०१०: ब्लॉगिंग को परिवर्तन के हथियार के रूप में ढालने की ज़रूरत है
जहां तक हिंदी का संबंध है, साहित्य और चिट्ठाकारिता का एक दूसरे के अभिन्न सहचर्य में ही विकास संभव है ! हिंदी के चर्चित चिट्ठाकार श्री प्रमो...
ब्लोगोत्सव-२०१० : यह सच है कि बार-बार हार-हार मैं गया !
मैं समय हूँ ! इस अवसर पर आज मुझे याद आ रही है महाप्राण निराला की वो पंक्तियाँ- यह सच है- तुमने जो दिया दान दान वह, हिंदी के हित का ...
ब्लोगोत्सव-२०१० : कार्यक्रम में अवरोध हेतु मुझे खेद है
कभी - कभी व्यक्ति विवश हो जाता है जब परिस्थितियाँ प्रतिकूल हो जाती है . कुछ ऐसा ही हुआ आज हमारे साथ . उत्सव का चौथा दिन था सुबह श्री रवि रत...
श्रेष्ठ पोस्ट श्रृंखला के अंतर्गत आज पढ़िए एक साथ हिंदी ब्लोगिंग से संवंधित कई आलेख
आज हम श्रेष्ठ पोस्ट श्रृंखला के अंतर्गत कई पोस्ट के लिंक दे रहे हैं , ऐसा इसलिए कि ये सभी लिंक हिंदी ब्लोगिंग की दशा-दिशा पर केन्द्रित है . ...
श्री अरविन्द श्रीवास्तव बता रहे हैं अंतरजाल पर कवियों की विश्राम स्थली कहाँ-कहाँ है ?
मैं समय हूँ ! मैंने हर काल खंड को भोगा है और महसूस की है उस खंड की सृजनात्मकता को ...मेरे पन्नों में दर्ज है हिंदी का पूर्वार्द्ध, उत्तरा...
ब्लोगोत्सव-२०१० के चौथे दिन के कार्यक्रम में आपका स्वागत है
मैं समय हूँ ! मैंने कहीं चिटठा चर्चा करते अनूप शुक्ल को देखा है तो कहीं उड़न तस्तरी प़र सवार होकर ब्लॉग भ्रमण करते समीर लाल को ....कहीं सा...
ब्लोगोत्सव-२०१० :आज के कार्यक्रम की सम्पन्नता
कल अविनाश वाचस्पति जी ने सुझाया कि अब कार्यक्रम का समापन न किया जाए , क्योंकि यह कार्यक्रम निरंतर सोपान की ओर अग्रसर है . समापन शब्द अवरोध प...