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हिंद-युग्म हिंदी भाषा और साहित्य के प्रोत्साहन में सन् 2006 से सक्रिय है। हिंद युग्म की शुरुआत 'मेरे कवि मित्र' नामक ब्लॉग से हुई, जिसपर हिंद युग्म के संस्थापक शैलेश भारतवासी अपने मित्रों की कविताएँ सप्ताहवार प्रकाशित किया करते थे। धीरे-धीरे इससे बहुत से कवि जुड़ गए और वे अपनी और अपने मित्र कवियों की कविताएँ प्रकाशित करने लगे। जनवरी 2013 से इस ब्लॉग को एक वेबसाइट का रूप दिया गया और इसका नाम 'हिंद युग्म' रखा गया। इसी समय से हिंद युग्म ने इंटरनेट पर प्रकाशित हो रही कविताओं को प्रोत्साहित करने तथा यूनिकोड (हिंदी) को बढ़ावा देने के लिए एक मासिक प्रतियोगिता शुरू की, जिसे यूनिकवि एवं यूनिपाठक प्रतियोगिता का नाम दिया गया। इस प्रतियोगिता के माध्यम से हिंद युग्म ने हिंदी कविता को बहुत से नए कीर्तिमान दिए। इसके बाद हिंद युग्म ने बाल-साहित्य का प्रकोष्ठ 'बाल-उद्यान' शुरू किया। हिंद युग्म ने संगीत से जुड़ी नई प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और पॉडकास्टिंग को निरंतरता से संपादित करने व साहित्य को संगीत से जोड़ने की पहल अपने 'आवाज़' मंच के माध्यम से शुरू की। इसके अतिरिक्त हिंद युग्म वेबसाइट ने कहानियों के लिए 'कहानी-कलश', चित्रों-फोटो के लिए 'चित्रावली' और सम-सामयिक मुद्दों पर चर्चा के लिए 'बैठक' नामक मंच की शुरुआत की। हिंद युग्म ने इंटरनेट पर हिंदी की धमक को जन साधारण तक पहुँचाने के लिए 2008 के विश्व पुस्तक मेला में हिंदी ब्लॉग का प्रतिनिधित्व किया।

हिंद-युग्म ने 2010 के विश्व पुस्तक मेला से अपने प्रकाशन की शुरुआत की है और अब तक 80 से अधिक पुस्तकों का प्रकाशन कर चुका है। हिंद युग्म ने साल 2012 के अंत में हिंदी का एकमात्र बेस्ट-सेलर चौराहे पर सीढ़ियाँ’ और साल 2013 के पहले बेस्ट-सेलर टर्म्स एंड कंडीशन्स अप्लाई’ का प्रकाशन कर चुका है। हिंद युग्म से प्रकाशित 'बम संकर टन गनेस' साल 2013 की सबसे अधिक चर्चित किताबों में से एक रही है। हाल के दिनों में हिंद युग्म से प्रकाशित 'नमक स्वादानुसार', 'खैर छोड़ो' और 'जानेमन जेल' भी बेस्ट सेलर की श्रेणि में शामिल हो चुके हैं। त्रुटिरहितउत्कृष्ट डिजाइन एवं सुंदर छपाई में भी हिंद-युग्म की अपनी एक पहचान बन चुकी है।

हिंद-युग्म सन् 2009 से अंग्रेजी-से-हिंदी एवं हिंदी-से-अंग्रेजी भाषा में अनुवाद का कार्य कर रहा है और बहुत कम समय में इस क्षेत्र में अपना विशिष्ट स्थान बना लिया है।



ये रही उससे जुड़ी कुछ किताबें = 




























परिकल्पना ब्लॉगोत्सव में आज बस इतना ही, मिलती हूँ कल फिर इसी समय परिकल्पना पर फिर एक नई प्रस्तुति के साथ....तबतक के लिए शुभ विदा।

7 comments:

  1. bahut sundar prastuti ...bahut-bahut badhaai Rashmi ji ko aur Shailesh Bharatwasi ko ..

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  2. जी बुरा न मानें तो 'बेस्ट-सेलर' के मायने नहीं समझ पा रहा हूं. बहुत सी जगह यह पढ़ता आया हूं. क्‍या है कि‍सी के सापेक्ष है.

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