आईये अब चलते हैं हिंदी के बहुचर्चित व्यंग्यकार और ब्लोगर श्री राजीव तनेजा जी के पास और पूछते हैं उनसे कि क्या है उनके लिए आज़ादी के मायने ?
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कहने को तो आज साठ वर्ष से ज़्यादा हो चुके हैँ हमें पराधीनता की बेड़ियाँ तोड़ आज़ाद हुए लेकिन क्या आज भी हम सही मायने में आज़ाद हैँ?..मेरे ख्याल से नहीं
() ऐसी आज़ादी किस काम की जो हमें धार्मिक उन्माद और संकीर्णता के दायरे से मुक्त ना कर सके?…
() ऐसी आज़ादी किस काम की जहाँ खाप पंचायतों के उल-जलूल फरमानों के चलते हमें अपनी मर्जी से अपना जीवन साथी को चुनने की छूट ना हो?
() ऐसी आज़ादी किस काम की कि भ्रष्टाचारी …दुराचारी लोग हमारे देश की जड़ों को खोखला कर…हमारी ही अस्मिता को नीलाम करने के बावजूद…हमारे ही सरमाएदार बने बैठे हैं…और हम हैं कि उन्हीं को अपना आदर्श मान…उन्हीं के नक्शेकदम पे खुद चलने की कोशिश कर रहे हैं?…
() ऐसी आज़ादी किस काम की कि दुश्मन देश की नीयत जानने के बावजूद….अफज़ल गुरु के नापाक इरादों के उजागर होने के बाद…और अपने जुर्म के पुख्ता सबूत होने के बावजूद भी कसाब अभी तक जिंदा है?
() आज हमारे यहाँ का हर छोटा-बड़ा अफसर…विधायक से लेकर सांसद तक और मंत्री से लेकर संतरी तक…सभी भ्रष्टाचार में पूर्णरूपेण लिप्त नज़र आते हैं…
() आज़ादी का ये मतलब तो नहीं हो जाता कि किसी को क़ानून की परवाह ही नहीं हो…किसी क़िस्म का कोई डर ही नहीं हो …

क्या अंग्रेजों का राज़ होता तो ये सब संभव हो पाता?…मेरे ख्याल से नहीं
राजीव तनेजा
http://hansteraho.blogspot.com/
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जारी है परिचर्चा मिलते हैं कल सुबह ०६ बजे फिर से किसी महत्वपूर्ण चिट्ठाकार के विचारों के साथ ......

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